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4000 रुपए मकान किराया और बिजली बिल 6857 का, हर चाैथे उपभोक्ता को एवरेज बिल
उज्जैन :- मैं महानंदा नगर में एक कमरे के मकान में किराए से रहती हूं। मकान का किराया 4 हजार रुपए हैं। इससे ज्यादा बिजली कंपनी बिजली बिल दे रही है। मई का बिल 6857 रुपए दिया है। मक्सी रोड जोन पर लगाए बिजली समस्या निवारण शिविर में बुधवार को इस तरह की शिकायत लेकर डॉ.सुनीता राज सोलंकी पहुंचीं। यहां उनकी शिकायत का निराकरण नहीं किया तो उन्होंने एएसई केतन रायपुरिया को ज्यादा बिल आने की शिकायत की। उनका कहना था मैं खाचरौद में अतिथि विद्वान होने से वहां रोजाना जाती हूं। इस वजह से बिजली का उपयोग कम ही होता है बावजूद इसके बिजली बिल ज्यादा दिया जा रहा है। बिल पर पता भी महानंदा नगर की जगह महेंद्र नगर लिखा है। बिजली कनेक्शन ओमप्रकाश गोयल के नाम से है। एएसई ने मीटर रीडिंग करवाकर बिल में सुधार की बात कही। प्रभुलाल ने 150 यूनिट व किशनचंद ने 220 यूनिट अतिरिक्त जोड़कर बिल दिए जाने की शिकायत की। अधिकांश शिकायतें एवरेज बिल की थी।
197 शिकायतें पहुंची, अधिकांश बिल की
नौ जोन कार्यालयों पर लगाए शिविर में 197 शिकायतें पहुंची। बिजली कंपनी के कार्यपालन यंत्री एसके जैन व एएसई केतन रायपुरिया ने बताया 168 का निराकरण शिविर में किया गया। अधिकांश शिकायतें बिल को लेकर थी। इनमें मीटर रीडिंग चैक करवाई व बिलों में सुधार किया। अब 29 शिकायतें शेष हैं, जिनमें मीटर खराब होने व नया मीटर नहीं लगाए जाने आदि की है, इनका निराकरण तीन से सात दिन में किया जाएगा।
नए कनेक्शन के लिए मैदानी अमले को आदेश दिए हैं
*बिल में सुधार जैसी शिकायतों का निराकरण हाथों हाथ किया जा सकता था, उन्हें किया है, बाकी नया कनेक्शन या मीटर बदलने जैसी शिकायतों के निराकरण के आदेश मैदानी अमले को दिए हैं। केतन रायपुरिया, एएसई, बिजली कंपनी
यह कैसा शिविर….काउंटर व बोर्ड तक नहीं
शिविर के हाल यह थे कि यहां काउंटर तक नहीं लगाए। शिविर संबंधी जानकारी के लिए बोर्ड भी नहीं थे। लोग जोन कार्यालयों पर यह पूछते देखे कि शिविर कहां लगा है। उन्हें यहां-वहां भटकना पड़ा। यहां आवेदन फार्म भी उपलब्ध नहीं थे। बिजली कर्मियों का कहना था कि हमें फार्म नहीं दिए हैं। इस वजह से शिकायतें रजिस्टर में नोट करना पड़ रही है।
ऑनलाइन शिकायतें दर्ज नहीं हो पाई
नेट बंद होने से बिजली कंपनी का काम प्रभावित हुआ। शिविर में उपभोक्ताओं की ऑनलाइन शिकायतें दर्ज नहीं हो सकी। इस वजह से समस्याओं के निराकरण में भी परेशानी आई। मैनुअली शिकायत दर्ज करना पड़ी।